तेरी बेवफाई का ही सिला है
की आज इक मुकाम सा हूँ
कल तक जिन राहों के लिए अनजान था ,
आज उन राहों की पहचान सा हूँ ,
फेर लिया करते थे यु ही नजरे मुझसे,
जैसे शख्स कोई बेजान सा हूँ,
आज हर जुबा पे छाया रहता है बस नाम मेरा
जैसे बरकत की कलाम सा हूं,
तेरी बेवफाई का ही सिला है
की आज इक मुकाम सा हूँ,
मुझे कतल करने को चले थे
कभी यु लोग सारे,
बेबस से बैठे है आज.
जो आज में खुद आवाम सा हूँ,
तेरी बेवफाई का ही सिला है
की आज इक मुकाम सा हूँ ,
कदर न थी तुझे मेरी ऐ जानशीन
आज देख हर जवा धड़कन में
दिल्लगी का जैसे पैगाम सा हूँ .
तेरी बेवफाई का ही सिला है
की आज इक मुकाम सा हूँ ,
की आज इक मुकाम सा हूँ
कल तक जिन राहों के लिए अनजान था ,
आज उन राहों की पहचान सा हूँ ,
फेर लिया करते थे यु ही नजरे मुझसे,
जैसे शख्स कोई बेजान सा हूँ,
आज हर जुबा पे छाया रहता है बस नाम मेरा
जैसे बरकत की कलाम सा हूं,
तेरी बेवफाई का ही सिला है
की आज इक मुकाम सा हूँ,
मुझे कतल करने को चले थे
कभी यु लोग सारे,
बेबस से बैठे है आज.
जो आज में खुद आवाम सा हूँ,
तेरी बेवफाई का ही सिला है
की आज इक मुकाम सा हूँ ,
कदर न थी तुझे मेरी ऐ जानशीन
आज देख हर जवा धड़कन में
दिल्लगी का जैसे पैगाम सा हूँ .
तेरी बेवफाई का ही सिला है
की आज इक मुकाम सा हूँ ,
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